
आज बिहार बाढ़ में डूबा हुआ है , सरकार मणिपुर का हाल जानना भी नहीं चाहती, देश में हर दिन 82 से 85 महिलाओं का रेफ हो रहा, देश में हर दिन 30 से 35 किसान आत्महत्या कर रहे हैं, देश के 100 करोड़ में से 40 करोड़ युवा बेरोजगार हैं। और ये सब आकड़े सरकार के द्वारा स्वयं दिये गए हैं, वास्तविकता तो इससे भी बद्तर होगी, पर भारत का चौथा स्तंभ यानी मीडिया, पत्रकार ,आज केवल इस बात पर ध्यान दे रहे कि मोदी जी के जन्मदिन की हेडलाइन क्या रखे, उनको आज विष्णु के किस अवतार से तुलना करे, मोदी जी के जन्मदिन पर सरकारी दफ़्तर में दीपक कितना तेज़ प्रज्वलित होना चाहिए।यही सबसे बड़ा टास्क है। देश के बड़े मीडिया एजेंसी और बड़े पत्रकार आज बिक चुके हैं, हम सब को ये महसूस भी होता है, पर यह लगता है कि हम क्या ही कर सकते हैं, मोदी जी 24 घंटों में 10 घंटे न्यूज की हेडलाइन बने हुए हैं और बाकी के समय इंस्ट्राग्राम की रील में वो आते रहते हैं, देश में महंगाई, बेरोजगारी, हिंसा, आपसी तनाव बढ़ रहा है, चीन,अमेरिका हर मंच में भारत को पछाड़ रहा है, पर भारत की मीडिया उस पछाड़ को भी मोदी का मास्टरप्लान बता रही है। यही कारण है कि पत्रकारिता के वैश्विक स्तर पर भारत आज नेपाल, भूटान , श्री लंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी नीचे है पर पत्रकारों के अकाउंट में रकम अमेरिका के पत्रकारों से भी ज़्यादा है। आज सोशल मीडिया में आम लोगों द्वारा पत्रकारिता शुरू हो गई है जिसका सीधा अर्थ है कि परंपरागत एजेंसी मीडिया से देश के लोगों का भरोसा उठ गया है। जरूरत है एक सच्चे पत्रकारिता की, एक विश्वसनीय पत्रकार की।
Comments (2)
Janta bhi to yahi enjoy karti hai.
आज जनता का क्या इंजॉय करेगी? यह भी राजनेता तय करते हैं