
आज के आधुनिक युग ने मशीनों को डेवलप और अपडेटेड बनाने के चक्कर में इंसान को आलसी,कमजोर और मशीनजीवी बना दिया है
हम भोजन, पानी, कपड़े, अपनी लाइफ के हर छोटे कार्य के लिए मशीनों पर निर्भर हो गए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने अब अपना पैर फैला रहा। यह कोई ताज़्जुब की बात नहीं होगी कि अगले 10 सालों में इंसानों को कोई काम ही नहीं रहेगा,फिर AI किसके लिए काम करेगा । आज हम अपनी नई पीढ़ी को ट्रेंड कर रहे कि वो मशीनों को अच्छे से ऑपरेट कर सके शायद यही हम गलती कर रहे, हम नई पीढ़ी को मशीनों के लिए तैयार कर रहे, हम मशीनों से मशीन बन कर नहीं जीत सकते।
हमे नई पीढ़ी को मनुष्य बनाने पर जोर देना चाहिए, बच्चों को नैतिकता, भावुकता, अच्छे आदर्श, ईमानदारी जैसे गुणों को सीखना चाहिए ताकि वो मशीन को प्रकृति हित में उपयोग कर सके
आज ग्लोबल वार्मिंग के कारण जो विनाश हो रहा उसका जिम्मेदार कौन है, मशीन तो बिल्कुल नहीं है, मनुष्य है, विश्व भर में जंगल,पेड़ प्राकृतिक संसाधन खत्म हो रहे तो जिम्मेदार मनुष्य है। मशीनों को कैसे उपयोग करना है यह पहला कदम होना चाहिए। आज 5 ,6 साल के बच्चों के हाथ में AI हैं, उनकी तस्वीरें, आवाज,उनके हाव भाव, उनकी भावनाएं मशीन सुन रही, देख रही। और बड़े बड़े उद्योगपतियों के हिसाब से वो जनता की भावनाओं को मैनिपुलेट कर रही। आज हम बाजार के हिसाब से सोचते हैं, बाज़ार के हिसाब से बोलते हैं। ध्यान देने की बात है क्या हम मौलिक बचे हैं? या नहीं। जरूरत है मौलिकता की।
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